Home About Us

About Us

भारत की सवा सौ करोड़ जनसंख्या में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या लगभग 12 करोड़ है।

आदिवासी समुदाय की ज्यादातर जनसंख्या भारत के दुर्गम तथा घने जंगलों में निवास करती हैं। जहाँ आज भी आम लोगों का पहुचना दुर्लभ है।

आदिवासी समुदाय की अपनी बोलियां, रीति रिवाज है। यह लोग आजतक भारत की प्राचीन लोक, संस्कृति, परम्परा को सहेज कर रखा हुआ है। आज भी कई दुर्लभ वस्तुए तथा खनिज संपदा इनके क्षेत्रों में ही पाये जाते है।

एक से बढ़कर एक प्राकृतिक सुन्दरता तथा पर्यटन स्थल आदिवासी बहुल इलाकों में ही देखने को मिलती है। इसके बावजूद भी शहर और आदिवासियों के बीच गहरी खाई है। आज भी हम इन्हें जंगली ही समझते हैं। इन सबका मूल कारण है आपसी परस्पर संबंध और अनभिज्ञता।

आपसी तालमेल का अभी तक कोई प्रयास नहीं हो पाया कि आदिवासी समुदाय और शहर में रहने वाले लोगों के बीच कोई ऐसा साधन हो जो एक दूसरे के बीच कड़ी का काम करे और परस्पर एक दूसरे को जाने समझे। देश दुनिया में क्या हो रहा है इससें आदिवासी समुदाय भी परचित हो, भारत सरकार इनके उथान के लिए क्या क्या योजनाएं चला रही है उनके बारे मे वह जाने और ठगने से बचे। दुर्गम क्षेत्रों में रह रहे

आदिवासी समुदाय अपनी बात सरकार, मिडिया तथा आम जनता तक अपनी अपनी भाषा बोली मे पहुंचा सके इसको ध्यान में रखकर हमनें "ट्राइबल इंडिया" नाम से डिजिटल चेनल लाने का बीड़ा उठाया है और 15 नवम्बर 2018 को भारत के महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के जयंती मे इसकी शुरूआत करने की योजना बनाई गई है।

यह दुनिया का पहला चेनल होगा जो पूरी तरह से आदिवासियों को सर्मपित होगा। "ट्राइबल इंडिया" मे देश दुनिया की तमाम खबरों के अलावा आदिवासियों की लोक, संस्कृति, परम्परा, पर्व त्योहार, गीत संगीत, लोक कथाएं, कहानियां, फिल्म, प्राकृतिक सुंदरता, पर्यटन स्थल, भोजन, सरकारी योजना, वर्तालाप, परिचर्चा सभी कार्यक्रम को दिखाने का प्रयास होगा।

"ट्राइबल इंडिया" चेनल की मूल भाषा हिंदी होगा और आदिवासी भाषा बोली को हिंदी सब टाईटल से समझाया जाएगा आगे चलकर इसे अंग्रेजी में भी प्रसारित किया जाएगा।