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सीआईपीयू के जरिये होगा क्राइम कंट्रोल, लंबित मामलों के निपटारे में भी आयेगी तेजी

राँची :सीआईपीयू के जरिये होगा क्राइम कंट्रोल, लंबित मामलों के निपटारे में भी आयेगी तेजी झारखण्ड पुलिस द्वारा अपराधिक घटनाओं की शीघ्र जांच कर अपराधियों को सजा दिलाने के लिए स्पेशल यूनिट (सीआईपीयू) का किया जायेगा गठन* झारखंड पुलिस अपराधिक घटनाओं की शीघ्र जांच कर अपराधियों को सजा दिलाने के लिए स्पेशल यूनिट तैयार किया गया है. इस यूनिट का नाम क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड प्रॉसिक्यूशन यूनिट (सीआईपीयू) रखा गया है. सीआईडी ने सीआईपीयू के गठन का प्रस्ताव झारखंड पुलिस मुख्यालय को भेजा था. इस प्रस्ताव पर डीजीपी नीरज सिन्हा ने सहमति देते हुए सीआईपीयू के गठन संबंधी आदेश जारी कर दिया है. अब सीआईपीयू के लिए जिला से लेकर राज्य स्तर पर पदाधिकारियों की तैनाती होगी. इसके साथ ही प्रत्येक थाने में सीआईपीयू का कामकाज देखने के लिए अफसर प्रतिनियुक्त किए जाएंगे. राज्य के प्रत्येक थानों में सीआईपीयू के तहत एक नोडल पदाधिकारी तैनात होंगे. वहीं, अनुसंधान के लिए प्रत्येक थानों में प्रति 50 पेंडिंग केस पर एक अनुसंधान पदाधिकारी को सीआईपीयू में रखा जाएगा. अनुसंधान पदाधिकारी कांड के अनुसंधान को फोकस करेंगे. वहीं, थाना स्तर पर नोडल पदाधिकारियों की जिम्मेदारी होगा कि ससमय गवाही पूरी कराए और कांडवार कोर्ट के आदेश, कार्रवाई से जांच पदाधिकारी को अवगत कराए. इसके साथ ही इसकी सूचना थानेदार को भी दें. सीआईपीयू के तहत थाने में तैनात दरोगा स्तर के अधिकारी की जिम्मेदारी बारीक अनुसंधान पर होगी. किसी केस में अगर आरोपी बरी हो गया तो बरी होने के कारणों का अध्ययन करना होगा और थानों में उस अपराधी के डोजियर खोलने से लेकर अन्य कार्रवाई करानी होगी. राज्य स्तर पर सीआईडी के अधीन सीआईपीयू काम करेगी. राज्य स्तरीय सीआईपीयू की कमान सीआईडी डीआईजी के जिम्मे होगी. उनके अधीन सीआईडी एसपी, इन्वेस्टिगेशन ट्रेनिंग स्कूल के डीएसपी और दो इंस्पेक्टरों की तैनाती होगी, जिला स्तर पर सीआईपीयू के कामकाज की मॉनिटरिंग करेगी. सीआईपीयू में राज्य स्तर पर एक रिव्यू कमेटी भी गठित की जाएगी. रिव्यू कमेटी में अभियोजन निदेशक, सीआईडी के डीआईजी और सीआईडी के एसपी रहेंगे. इस कमेटी का काम केस का विश्लेषण करना होगा. किसी केस में आरोपी बरी हो जाता है तो यह कमेटी उस केस की समीक्षा करेगी. समीक्षा के दौरान केस के अनुसंधान के साथ साथ पीपी और एपीपी के कामकाज की भी समीक्षा होगी. इसमें जिसकी गलती से आरोपी बरी होंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा यह कमेटी करेगी. क्राइम इन्वेस्टिगेशन एंड प्रॉसिक्यूशन यूनिट अपने अनुसंधान करने वाले पुलिस पदाधिकारियों पर कड़ी नजर रखेगी. किसी अधिकारी ने जानबूझकर केस को हल्का कर आरोपी को राहत दिलवाई है तो उसे के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. वहीं, जो पदाधिकारी बेहतर काम करके अपराधियों को जेल भेजेंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा. झारखंड पुलिस के वरीय अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक केस में पांच अलग-अगल संचिका बनेगी. पहली संचिका में नोट सीट इंट्री की जाएगी. केस डायरी के लिए अलग संचिका होगी, तीसरी संचिका में दर्ज बयान, प्रगति प्रतिवेदन और पत्राचार या अन्य कागजातों के लिए संचिका शामिल हैं. झारखंड में लगभग 50 हजार केस लंबित है. झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद लंबित केसों के अनुसंधान को शीघ्र निष्पादन किया जा रहा है, लेकिन मेन पावर कम होने की वजह से पुलिस के सामने चुनौती है. हालांकि, सीआईसीपू के गठन होने से लंबित केसों के निष्पादन में तेजी आएगी.

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